नाटक – “समर यात्रा”, मंचन दिनांक - 7 मार्च 2022, भोपाल, मध्यप्रदेश
# स्वराज संस्थान संचालनालय, संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश_शासन का आयोजन # आजादी का अमृत महोत्सव अंतर्गत।
# नाटक – “समर यात्रा”, मंचन दिनांक - 7 मार्च 2022,
भोपाल, मध्यप्रदेश
# मूल कहानी- महान साहित्यकार, लेखक श्री मुंशी प्रेमचंद जी।
# “समर_यात्रा" एक
गरीब वृद्धा द्वारा सत्याग्रहियों के स्वागत में अपने को अर्पण कर देने और
ग्रामीणों के हृदय में जोश भरने की श्री मुंशीप्रेमचंद जी कहानी है। "कर्मवीर सिंह
राजपूत" के निर्देशन में देशभक्ति से ओतप्रोत, भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास के स्वर्ण
पृष्ठों से गुम हो चुके चेहरों के अपार त्याग, समर्पण एवं बलिदानों को दर्शाती इस कहानी का अत्यंत
प्रभावी नाट्य मंचन हुआ।
निर्देशकीय :
नाटक "समर यात्रा" देश के अकीर्तित नायकों एवं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लोक व्यापीकरण होने की कहानी है । इस नाटक के माध्यम से हमें ज्ञात होता है कि भारतीय स्वतंत्रा संग्राम का आंदोलन कुछ गिने-चुने व्यक्तियों के व्यक्तिगत शौर्य और त्याग तक सीमित नहीं था, और ना ही यह कुछ समुदायों के सत्ता के विरुद्ध विद्रोह की गाथा मात्र था, वास्तव में जन-जन में स्वाभिमान जागृति के साथ-साथ आत्म चेतना का जनसैलाब था, जिसका भारत के सुदूर बसे गांव-गांव तक विस्तार हुआ था। समर यात्रा कहानी के पात्र अनजान गांव के अनजान देशभक्त हैं, यही इस कहानी की खूबसूरती है। आजादी के आंदोलन के वास्तविक चरित्र को तब तक नहीं समझ सकते, जब तक कि इस आंदोलन के लाखों अनाम स्वतंत्रता सेनानियों के हौसले और उनकी भागीदारी को पूरे सम्मान के साथ इतिहास के पन्नों पर अंकित ना कर लें। नाटक के माध्यम से हमे ज्ञात होता है कि अंग्रेजी सरकार ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले हमारे पूर्वजों पर कितने बर्बर अत्याचार किए। नाटक देख कर परतंत्र भारत में भारत वासियों की तात्कालीन परिस्थितियां जीवंत हो उठती हैं। आज़ादी की यात्रा कितनी कठिन थी, इसका आज हम और आप सिर्फ अंदाज़ा ही लगा सकते हैं। मैंने इस नाटक के माध्यम से उन समस्त स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने का प्रयास किया है, जिन्होंने अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। इस कहानी का नाट्य रूपांतरण करना मेरे लिए बहुत अच्छा अनुभव रहा। जय हिन्द। जय माँ भारती।
पात्र परिचय :
मंच पर -
1. नोहरी काकी - सुरभि
भारती होम्बल / अनमोल राठौड़
2. कोदई काका - रमेश
अहिरे / ब्रजकिशोर पटेल
3. मैकू - अभिषेक
सोनी
4. गंगा - प्रणय रोड़े
5. भजन सिंह – यश उंबरकर
6. भूरी - हर्षिता चौरे
7. काले खां - पंकज
पटेल
8. दल नायक - नीरज सिंह
चौहान
9. दल नायिका - अंजली
चौरे
10. आज़ादी का जत्था - मयूर
मालवीय, संजय के राज, अक्षत सिंह राजपूत
11. दारोगा - विवेक
त्रिपाठी
12. सिपाही - संदीप
मांझी, मयंक मालवीय
13. सूत्रधार 1 - अभिषेक सोनी
14. सूत्रधार 2 - प्रियांशी चौरे
15. ग्रामीण - प्रियांशी चौरे, भगवानदास बेधड़क, अक्षत सिंह, मोहम्मद उसामा, जगदीश पटेल
मंच परे -
1. गीत - लक्ष्मी नारायण पयोधि
2. संगीत - रवि अर्जुन,
3. मेकअप - माया के राज, संजय के राज
4. ड्रेस / वेश- भूषा - संजय के राज, माया के राज,
रुचि शर्मा, रेनू शर्मा
5. सेट / प्रॉपर्टी - बलवीर सिंह , रोहित राजपूत
6. प्रकाश परिकल्पना - दयानिधि /
धन्नूलाल सिन्हा
7. मूल कहानी - मुंशी प्रेमचंद
8. लेखन, रूपांतरण, परिकल्पना एवं
निर्देशन - कर्मवीर सिंह राजपूत, संपर्क – 8770854573
निर्देशक का परिचय :
श्री कर्मवीर सिंह राजपूत, पिता स्व श्री राम
सिंह राजपूत, माता प्रेमलता
राजपूत, जन्म 23, अगस्त 1987,
ग्राम डोलरिया, जिला होशंगाबाद, मध्य प्रदेश। बचपन से नाटक, कहानी पढ़ने और लिखने
में रूचि रही। नर्मदा महाविद्यालय, होशंगाबाद से बी. कॉम की डिग्री लेते
हुए नाटय विधा में सक्रिय हुए और यहीं से रंगमंच की यात्रा शुरू हुई और निरंतर जारी है।
कर्मवीर सिंह राजपूत ने 22 जून 2017 को "कर्मवीर थिएटर" (कर्मवीर जन शिक्षण
एवं संस्कृति समिति) नवीन नाट्य समूह को स्थापित कर स्वतंत्र रूप से रंगमच की सेवा
में समर्पित कर दिया।
1) सन 2006 से नाटक निर्माण, अभिनय एवं निर्देशन में सक्रिय एवं उत्कृष्ट भूमिका
2)
कर्मवीर जन शिक्षण एवं संस्कृति समिति के कार्यकारी अध्यक्ष एवं नवीन नाटक
समूह का संचालन
3)
विभिन्न नाटय प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन
4) छोटे कस्बों एवं
शहरों में नाट्य कला का प्रचार प्रसार में विशिष्ट भूमिका
5) भारतीय पुरातत्व
सर्वेक्षण मुंबई मंडल मुंबई और वेस्टर्न रेलवे द्वारा आयोजित विश्व धरोहर सप्ताह 2019 में निर्देशित नाटक “खुजराहो के शिल्पी” का सफल मंचन
6) मध्य प्रदेश शासन के
संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में नाटकों की प्रतिभगिता
7) वर्तमान में विभिन्न
नाटकों के लेखन, निर्देशन और प्रचार
प्रसार में सक्रिय I नाटकों द्वारा अच्छे
विचार और आदर्श जीवन दर्शन को सभी
के सामने रखना ही इनका उद्देश्य है I रंग समूह द्वारा
नाटक- हिन्दोस्तान जाकर कहना, खराशें अब भी बाकी
है, फांसी से बढ़कर, महाभारत की एक साँझ, कर्मा…. कौमी एकता, एकलव्य, कौमुदी महोत्सव, हैमलेट, उत्सर्ग, कोर्ट मार्शल, खजुराहो
का शिल्पी, रक्तबीज,
ENCRYPTION, जिन्दा है सुकरात, रसिक संपादक, समर यात्रा का निर्माण एवं मंचन किया गया है I भविष्य में भी अच्छे नाटकों का रूपांतरण एवं मंचन
के लिए लगातार अग्रसर है I समय समय पर नाट्य कार्यशाला का आयोजन नाट्य समूह
द्वारा किया जाता है I
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